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उत्साह, खुशी और नयी प्रतिज्ञा के साथ हो नववर्ष का स्वागत : देवेंद्रसागरसूरिजी
December 31, 2019 • SANJAY JOSHIY • धार्मिक

बेंगलुरु। यहां पार्श्व सुशील धाम में विराजमान आचार्यश्री देवेंद्रसागरजी ने कहा कि हिन्दू पंचांग के अनुसार नया साल 1 जनवरी से शुरू नहीं होता। हिन्दू नववर्ष का आगाज गुड़ी पड़वा से होता है, लेकिन 1 जनवरी को नया साल मनाना सभी धर्मों में एकता कायम करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है, क्योंकि इसे सभी मिलकर मनाते हैं। उन्होंने कहा कि चूंकि साल नया है, इसलिए नई उम्मीदें, नए सपने, नए लक्ष्य, नए आईडियाज के साथ इसका स्वागत किया जाता है। नया साल मनाने के पीछे मान्यता है कि साल का पहला दिन अगर उत्साह और खुशी के साथ मनाया जाए, तो साल भर इसी उत्साह और खुशियों के साथ ही बीतेगा। आचार्यश्री बोले, नया साल एक नई शुरूआत को दर्शाता है और हमेशा आगे बढ़ने की सीख देता है। पुराने साल में हमने जो भी किया, सीखा, सफल या असफल हुए उससे सीख लेकर, एक नई उम्मीद के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हम पुराने साल के समाप्त होने पर दुखी नहीं होते बल्‍कि नए साल का स्वागत बड़े उत्साह और खुशी के साथ करते हैं, उसी तरह जीवन में भी बीते हुए समय को लेकर हमें दुखी नहीं होना चाहिए। जो बीत गया उसके बारे में सोचने की अपेक्षा आने वाले अवसरों का स्वागत करना चाहिए और उनके जरिए जीवन को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए। आचार्यश्री आगे बोले, संसार में जितने भी उत्सव हैं, पर्व हैं और शुभ दिन हैं, उन सबका मूल उद्देश्य हमारी जड़ता को तोड़कर उसे गतिशील बनाना होता है। ये पल हमारी एकरसता को भंग करके उनमें एक नया रंग भरते हैं, ताकि हमारी आंतरिक ऊर्जा अपने पूरे जोशोखरोश के साथ अपने काम में लग सके, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि आज हमारे लिए उत्सव जहां अंधविश्वासों का पालन करने तक सीमित हो गये हैं, वहीं त्यौहार खाने-पीने और खरीददारी करने तक। नया साल भी लगभग इसी में शामिल हो गया है- शुभकामनाएँ देने तक और खा-पीकर, मौज-मस्ती करने तक। यदि इस मौज-मस्ती से अपने में एक नई ऊर्जा का संचार नहीं होता, तो आपको समझ लेना चाहिए कि आपके लिए नया वर्ष मनाना व्यर्थ है। साथ ही समय और पैसे की बरबादी भी। मुनि महापद्मसागरजी ने कहा की नए का अर्थ ही है- सब कुछ नया। जिस प्रकार साँप अपनी केंचुली छोड़कर एक नया आवरण धारण करता है, बिल्कुल उसी तरह नये साल में हमें भी अपनी जड़-मानसिकता को छोड़कर नई मानसिकता अपनानी चाहिए।