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जीवन में सत्य, क्षमा, दया-दान को अपनाएं व क्रोध-लोभ को त्यागें: आचार्यश्री देवेंद्रसागरजी
February 6, 2020 • SANJAY JOSHIY • धार्मिक

श्रीमुनिसुव्रतस्वामी-राजेंद्रसूरीजी मंदिर के रजतजयंती महोत्सव के तहत ध्वजारोहण शुक्रवार को

बेंगलूरु। आचार्यश्री देवेंद्रसागरसूरीश्वरजी ने कहा कि दुर्लभ मनुष्य जीवन के बाद देव, गुरु व धर्म की शरण मिलना भी अति दुर्लभ है। उन्होंने धर्म की उत्पत्ति, स्थापना, धर्म कैसे बढ़ा व धर्म का विनाश कैसे हो रहा है इस पर भी विस्तार से व्याख्यान दिया। वे गुरुवार को यहां श्री श्रीमुनिसुव्रतस्वामी-राजेंद्रसुरी जिन मंदिर की 25वीं वर्षगांठ रजत जयंती महोत्सव के तहत दूसरे दिन अपना प्रवचन दे रहे थे। श्री मुनिसुव्रत-राजेंद्र जैन श्वेतांबर टेंपल ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम के दूसरे दिन प्रातः 6 बजे श्री भक्तामर पाठ एवं गुरु गुण इक्किशा, श्री गुरु महाराज सा. की अष्टप्रकारी पूजा विधिविधान से संपन्न हुई। आचार्यश्री ने भगवान श्रीकृष्ण एवं अर्जुन के महाभारत युद्ध के दौरान हुए एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि युद्ध के मैदान में भी उन्होंने धर्मचर्चा के लिए समय निकाला था। धर्म-प्रवचन को व्यक्ति के जीवन में नितांत आवश्यक बताते हुए देवेंद्रसागरजी ने कहा कि शुद्ध आचरण से धर्म का मार्ग व्यक्ति के मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि सत्य के द्वारा धर्म की उत्पति होती है, क्षमा के द्वारा धर्म की स्थापना होती है, दया व दान से धर्म बढ़ता है तथा क्रोध और लोभ के द्वारा धर्म का विनाश अर्थात सुख नष्ट होता है। तुच्छ व्यवहार-भावना को त्यागने की प्रेरणा देते हुए आचार्यश्री बोले, व्यक्ति के व्यवहार-आचरण में प्रेम, माधुर्य, वात्सल्य होना आवश्यक है तभी धर्म व्यापक होगा। बीसवें तीर्थंकर भगवान श्रीमुनिसुव्रत स्वामीजी को शनि ग्रह की प्रधानता के रुप में बताते हुए उन्होंने कहा कि आर्थिक रुप से संपन्नता के लिए परमात्मा से प्रीति-भक्ति बढानी चाहिए तभी अनुराग और कृपा भी भरपूर मिलेगी। इस अवसर पर मुनिश्री महापद्मसागरजी ने बेहद सरल अंदाज में विभिन्न उदाहरणों के साथ कहा कि मनुष्य जीवन को रागद्वेष में व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। हीरे के समान अमूल्य जीवन के समय का मूल्यांकन जरुरी है। उन्होंने केवली भगवान के गौतमस्वामीजी के प्रवचन श्रवण से जुड़ी एक कथा बताते हुए कहा कि भगवान महावीर स्वामी ने परमात्मा की पूजा से भी पहले जिनवाणी-व्याख्यान श्रवण की महत्ता बताई है अर्थात् दुर्लभ मनुष्य जन्म के बाद जिनवाणी सुनना भी दुर्लभ है। ट्रस्टी चंपालाल ओ सी जैन ने बताया कि शुक्रवार को प्रातः आयोजन के तीसरे दिन परमात्मा, गौतमस्वामी  एवं गुरुमहाराज की ध्वजा, चैत्य अभिषेक सहित विविध धार्मिक कार्यक्रम होंगे। मंदिर परिसर का विभिन्न प्रकार के फूलों से सजावट भी की जाएगी। ट्रस्ट के अध्यक्ष भंवरलाल कटारिया ने सभी का स्वागत किया। डूंगरमल चोपड़ा ने बताया कि कार्यक्रम में शांतिलाल सोलंकी, कांतिलाल कबदी, तेजराज नागोरी, रमेश सालेचा, प्रकाश बालर, नेमीचंद सिंघवी, भंवरलाल भंडारी, राजेश कांकरिया, उगमराज भंडारी, लेखराज डोसी, प्रेमा मूथा सहित अनेक आरती मंडल व अनेक श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे।