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दाहोद में डॉ वसंतविजयजी म.सा.का भव्य मंगल प्रवेश
December 28, 2019 • SANJAY JOSHIY • धार्मिक

जीवन को सर्वोत्तम बनाने के लिए उसे समझना जरूरी : राष्ट्रसंत डॉ वसंतविजयजी म.सा.

दाहोद। परमात्मा की भक्ति, भजन-आराधना यदि उल्लास पूर्वक हो तो व्यक्ति के मन में विकार नहीं बल्कि विचार उत्पन्न होते हैं। यही विचार उस व्यक्ति को जीवन पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। यह कहा कृष्णगिरी शक्तिपीठाधीपति राष्ट्रसंत डॉ वसंतविजयजी महाराज साहेब ने। शनिवार को यहां गुजरात प्रांत के दाहोद कस्बे में पहली बार अपनी दिव्य अमृत वाणी एवं महामांगलिक प्रदान करने पहुंचे थे। आयोजन से जुड़े परम गुरुभक्त दिव्य चोपड़ा ने बताया कि श्री सीमंधर स्वामी जैन तीर्थ दाहोद के तत्वावधान में यहां नगरपालिका के समीप से गुरुदेवश्रीजी का भव्य प्रवेश शोभायात्रा के साथ हुआ। नगर पालिका दाहोद के चेयरमैन अरविंद चोपड़ा ने संतश्रीजी की अगवानी की। ढोल ताशों, बैंड बाजों एवं पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं द्वारा कलश यात्रा के साथ गुरुदेव श्रीजी का प्रथम बार उल्लासपूर्ण नगर प्रवेश कराया गया। दिव्य चोपड़ा ने बताया कि इस अवसर पर सीमंधर स्वामी जैन तीर्थ के अध्यक्ष भंवरकुमार चोपड़ा, कनकभाई तलेसरा, कन्हैयालाल बुरड़ सहित नगर पालिका के अनेक सदस्यगण व बड़ी संख्या में सर्व समाज के गणमान्य जन मौजूद रहे। डॉ वसंतविजयजी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को अपनी प्रेरणादायक प्रवचन में कहा कि धर्म के नाम पर पाप कर्म कतई स्वीकार्य नहीं होने चाहिए। सर्वधर्म दिवाकर, सिद्धि सम्राट डॉ वसंतविजयजी ने यह भी कहा कि उनका यही उद्देश्य है कि हमारी युवा पीढ़ी को धर्म व संस्कार युक्त सही प्रेरणा मिले तथा भटकाव की बजाय वे सही दिशा की ओर बढ़े। प्रभु पार्श्व के 108 नाम व मां पद्मावती की महिमा का भी उन्होंने उल्लेख किया। संतश्रीजी ने श्वांस की प्रक्रिया को सर्वोत्तम बनाने की सीख देते हुए कहा कि जीवदया एवं प्राणी मात्र की सेवा-समर्पण की तृप्ति आपको सकारात्मक रूप से आगे बढ़ाती ही है। उन्होंने कहा जीवन को सर्वोत्तम बनाने के लिए उसे समझना भी जरूरी है। शरीर के रसायन सही होंगे तभी आपका जीवन भी सही होगा। इस अवसर पर अनेक श्रद्धालुओं को अपनी दिव्य मांगलिक आशीर्वाद प्रदान करते हुए चमत्कृत अंदाज में भक्ति के प्रतिफल के रूप में उन्होंने प्रभु पार्श्व एवं मां पद्मावती की कृपा स्वरूप घर व प्रतिष्ठान में पांच-पांच रुपये के सिक्के प्राप्त होने की घोषणा की, जो कि वाकई चमत्कृत रुप से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को प्राप्त हुए। आयोजन की विभिन्न व्यवस्थाओं में आदित्य चोपड़ा, राहुल सुराणा, शशांक छज्जलानी, दिव्येश बागरेचा, दर्शन चोपड़ा, मितेश तलेसरा, राकेश लुणावत व किशन चोपड़ा आदि ने सहयोग किया। कार्यक्रम का संचालन संगीतकार राजेंद्र करणपुरिया ने किया। सभी का आभार दिव्य चोपड़ा ने जताया।