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बिहार के प्रवासी मजदूरों को वापस लाने के लिए विकासशील इंसान पार्टी द्वारा पटना हाई कोर्ट में दायर किया गया जनहित याचिका
April 29, 2020 • Just Rajasthan Team • राष्ट्रीय

दूसरे राज्यों में फंसे बिहार के सभी मजदूरों को प्रदेश वापस लाने की गारंटी करे सरकार : मुकेश सहनी

न्यूजडेस्क। वैश्विक महामारी कोरोना से जंग के बीच लॉकडाउन के दौरान देश के दूसरे राज्यों में फंसे बिहार के मजदूरों को सुरक्षित प्रदेश वापस लाने के लिए विकासशील इंसान पार्टी द्वारा पटना हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।पार्टी की तरफ से राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय कुमार मनु द्वारा याचिका दाखिल की गई है।
इस अवसर पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सन ऑफ मल्लाह मुकेश सहनी ने कहा कि बिहार सरकार को मजदूरों के जान की चिंता नहीं है। इस संकट की घड़ी में दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों के वापस बिहार लाने के सवाल पर सरकार की चुप्पी तथा संवेदनहीनता से हजारों-हजार मजदूरों के जान पर आफत मंडरा रहा है। ऐसे में सरकार तमाम मजदूर भाइयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करे। साथ ही सभी को अतिशीघ्र 10,000 रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए।सन ऑफ मल्लाह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि नीतीश कुमार आज मजदूरों के वापस आने से संक्रमण फैलने की बात कर रहे हैं। उस समय वे कहां थे जब केंद्र सरकार द्वारा विदेश से 18,000 लोगों को भारत लाया जा रहा था। उन्होंने सरकार के अपने सहयोगियों से सवाल क्यों नहीं किया और आज मजदूरों को वापस अपने प्रदेश आने से रोका जा रहा है। बिहार से बाहर फंसे प्रत्येक मजदूरों को अपने घर बिहार लाने के सभी इंतजाम किया जाए। उन्होंने कहा कि मजदूर हजारों किमी दूर से हजारों रुपया खर्च कर एम्बुलेंस, ट्रक तथा किसी तरह वापस आ रहे हैं। उनकी निगरानी तथा जांच और क्वारंटाइन की कोई व्यवस्था नहीं है। सरकार उन सभी को अपनी जिम्मेदारी पर सुरक्षित वापस लाए, उन्हें क्वारंटाइन में रखे और उनकी तथा उनके परिवार की सुरक्षा की गारंटी करे। मुकेश सहनी ने कहा कि ऐसे में जब एक हफ्ते में कोरोना के संक्रमण में 300 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है सरकार अपनी जिम्मेदारियों से भाग रही है। सरकार में बैठे लोगों को समझना चाहिए कि प्रदेश का धन-दौलत और संसाधन पर मजदूरों का भी हक़ है। अपनी नाकामी छुपाने के लिए दूसरे राज्यों की सरकार से बिहार से लाखों प्रवासी मजदूरों की देखभाल करने की आशा रखना बिहार सरकार की संवेदनहीनता और अकर्मण्यता को दर्शाता है। बिहार के मुख्यमंत्री को उत्तर प्रदेश सरकार से सीख लेनी चाहिए और मजदूरों की सुरक्षित वापसी की अपनी जिम्मेदारी को पूरा करना चाहिए।