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आचार्य लोकेशमुनिजी व डॉ मृदुला सिन्हा ने कथक केंद्र दीक्षांत समारोह में स्नातकों को डिग्री प्रदान की
February 19, 2020 • SANJAY JOSHIY • धार्मिक

कला व संगीत के क्षेत्र में भारतीय परम्पराओं को महत्व देना जरूरी : आचार्य लोकेशमुनिजी 

नई दिल्ली। अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक प्रख्यात जैन आचार्य डा. लोकेशमुनिजी ने संस्कृति मंत्रालय व संगीत नाटक अकादमी के उपक्रम कथक केंद्र के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया, जहां पूर्व राज्यपाल डॉ मृदुला सिन्हा ने आशीर्वचन स्वरूप दीक्षांत उद्बोधन दिया। कथक केंद्र की सलाहकार समिति की अध्यक्ष सुश्री कमलिनी अस्थाना तथा निदेशक श्री चुघ ने भाग लिया। पूर्व राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने सभी छात्रों को स्नातक कोर्स सम्पूर्ण करने पर प्रमाण पत्र प्रदान किए एवं बधाई दी ।  उन्होने जीवन में मूल्यपरक शिक्षा पर दीक्षांत उद्बोधन देते हुए कहा कि हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली कैसी है और वह किस प्रकार के जीवन का निर्माण कर रही है तथा हमारी शिक्षा वास्तव मे कैसी होनी चाहिए। उनका सीधे शब्दों में कहना था कि हमारी शिक्षा केवल पुस्तकों एवं स्कूल, कॉलेज तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। शिक्षा को वास्तविक जीवन में इस्तेमाल करके नए कीर्तिमान स्थापित करने चाहिए । आचार्य लोकेशमुनिजी ने इस अवसर पर कहा कि शास्त्रीय संगीत भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है और कथक इसकी बहुत सुंदर प्रस्तुति है। उसे कठोर अभ्यास, तपस्या व साधना के द्वारा ही आत्मसात किया जा सकता है। उन्होने कहा कि वर्तमान समय में जब विश्व जनमानस और विशेष रूप से युवा वर्ग डिजिटल उपकरणों से जुड़ता जा रहा है, शिक्षा प्रणाली मे बदलाव करना आवश्यक है। शिक्षा प्रणाली संस्कार निर्माण की ओर ध्यान दे और पीस एजुकेशन को शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बनाए। कथक केंद्र की सलाहकार समिति की अध्यक्ष एवं अंतराष्ट्रीय कथक कलाकार सुश्री कमलिनी अस्थाना ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि युवा समाज व देश की रीढ़ होती है एवं सदैव ऊर्जा से भरे हुए होते है लेकिन उन्हे आवश्यकता है तो केवल सही दिशा में चलकर सटीक निर्णय लेने की, जिससे जीवन में बुलंदियों को हासिल कर समाज को बेहतर बनाने और राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा सके। कथक केंद्र के निदेशक श्री चुघ ने आचार्य लोकेशजी एवं अन्य अतिथियों का शाल व प्रतीक चिन्ह द्वारा स्वागत भी किया। समारोह में न्यू यॉर्क से पधारे डॉ जय सरकार परमानंद स्वामीजी भी मौजूद रहे। इस अवसर पर छात्र व छात्राओं ने अपनी गीत, संगीत, नृत्य आदि की प्रभावी प्रस्तुतियों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।